A beautiful blog of poetry which touched my ♥ deeply. Sharing one of them. The hindi poetry lovers do check

आँख खुली तो देखा मैंने,
रात अजब एक बात हुई थी ।
अंगड़ाई लेती थी सुबह
औंधी गहरी रात हुई थी ॥
पक्षी भी सारे अब चुप थे,
घोंसलों में बैठे गुमसुम थे,
कैसी ये घटना उनके संग
यूँही अकस्मात् हुई थी ।
आँख खुली तो देखा मैंने,
रात अजब एक बात हुई थी ॥
सूरज की अब धूप भी नम थी,
तपिश भी उसमें थोड़ी कम थी,
स्थिति बनाती और गहन तब
तेज़ हवा भी साथ हुई थी ।
आँख खुली तो देखा मैंने,
रात अजब एक बात हुई थी ॥
शर्म छोड़ सब पेड़ थे नंगे,
टेढ़े मेढ़े और बेढंगे,
झड़प हुई थी उनमें या कि
पत्तों की बरसात हुई थी ।
आँख खुली तो देखा मैंने,
रात अजब एक बात हुई थी ॥











